कुवैत की जनसंख्या 48 लाख, इनमें 10 लाख भारतीय हैं; सरकार कानून बनाकर 40 फीसदी प्रवासियों को बाहर करना चाह रही-
- कुवैत सरकार विदेशी नागरिकों की संख्या घटाना चाह रही है, इसके लिए कानून का मसौदा तैयार किया है
- अगर यह कानून लागू हो गया तो कम से कम तीन से चार लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है
कुवैत सरकार देश में काम करने वाले प्रवासी नागरिकों की संख्या कम करना चाह रही है, इसके लिए एक कानून का मसौदा तैयार किया गया है। इस कानून का सबसे बड़ा असर भारतीय नागरिकों पर हो सकता है। कुवैत में अभी करीब 10 लाख भारतीय नागरिक रहते हैं।
हालांकि, इस कानून का असर कुवैत में काम करने वाले सभी देशों के नागरिकों पर होगा, लेकिन सबसे ज्यादा भारतीय नागरिक प्रभावित होंगे, क्योंकि प्रवासियों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की ही है। अगर यह कानून पारित हो गया तो संभावना है कि तीन से चार लाख प्रवासी भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है।- कुवैत की समस्या
देश की कुल आबादी में 70 फीसदी प्रवासी हैं
- धीरे-धीरे बड़ी संख्या में प्रवासियों को अपनी तरफ आकर्षित करते करते कुवैत एक प्रवासी-बहुल देश बन गया है। देश की कुल 48 लाख आबादी में सिर्फ 30% कुवैती और 70% प्रवासी हैं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों की वजह से अब वहां प्रवासी-विरोधी भावनाएं गहरा रही हैं, जिसकी वजह से सरकार को इस समस्या पर ध्यान देना पड़ा।
- कुवैत सरकार ने लक्ष्य बनाया है कि आबादी में प्रवासियों की संख्या को 70% से कम कर के 30% पर लाना है। मीडिया में आई खबरों के अनुसार प्रस्तावित कानून में देश की आबादी में प्रवासी भारतीयों की संख्या घटाकर आबादी का 15% करने की बात की गई है।
- अगर यह कानून लागू हो गया तो सिर्फ लगभग सात लाख प्रवासी भारतीयों को ही कुवैत में रहने की अनुमति मिल पाएगी और कम से कम तीन से चार लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ेगा।
- स्थानीय मीडिया में कहा जा रहा है कि करीब आठ लाख भारतीयों को देश छोड़ना पड़ सकता है। इस कानून को अभी तक कुवैती संसद की दो महत्वपूर्ण समितियों से स्वीकृति मिल चुकी है और एक और समिति से स्वीकृति मिलना बाकी है।

DATE - 24 DEC 2025 हरिद्वार: कांगड़ी में गंगा मैया की छाती चीर रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन VIDEO हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा की पवित्रता और उसके अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ताज़ा मामला कांगड़ी क्षेत्र का है, जहाँ 'गंगा मैया' की गोद में चोरी-छिपे अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि यह सब कुछ बिना किसी रोक-टोक के प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। रात के अंधेरे में "सक्रिय स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कांगड़ी और उसके आसपास के तटवर्ती इलाकों में खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर गंगा की जलधारा के बीचों-बीच से रेत और पत्थर निकाला जा रहा है। बिना रोक-टोक जारी है 'काला कारोबार' हैरानी इस बात की है कि जिस क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, वहाँ बेखौफ होकर खनन सामग्री ढोई जा रही है। निगरानी का अभाव: संबंधित विभाग के अधिकारी इस ओर से आँखें मूँदे बैठे हैं। पर्यावरण को खतरा: अंधाधुंध खनन के कारण गंगा का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। आस्था और पर्यावरण...
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