सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

झूठा है सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोरोनावायरस से जुड़ी जानकारी शेयर करने पर रोक लगाने का दावा FORCE-TODAY

कई दिनों से सोशल मीडिया में एक मैसेज वायरल किया जा रहा है। इसमें लिखा है- ‘आज रात 12 बजे से देशभर में डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू हो चुका है। इसके बाद सरकारी विभागों को छोड़कर अन्य कोई भी नागरिक कोरोनावायरस से संबंधित किसी भी तरह की जानकारी शेयर नहीं कर सकेगा। ऐसा करने पर कानूनी कार्रवाई होगी। वायरल मैसेज में वॉट्सऐप ग्रुप एडमिंस को भी सलाह दी गई है कि वे यह मैसेज अपने ग्रुप में फॉरवर्ड कर दें।’ इस मैसेज के साथ ही न्यूज वेबसाइट लॉइव लॉ की लिंक भी वायरल की गई है। लाइव लॉ ने खुद अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से इस वायरल दावे का खंडन किया है। वेबसाइट की तरफ से किए गए ट्वीट में लिखा है कि लाइव लॉ की रिपोर्ट के साथ एक फेक मैसेज वॉट्सऐप ग्रुप में वायरल किया जा रहा है। कृपया इसे साझा न करें।           
भारत सरकार के पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) ने भी वायरल दावे का खंडन करते हुए ट्वीट किया कि, सरकार द्वारा कोविड-19 को लेकर किसी भी तरह की जानकारी शेयर करने पर रोक लगाने का दावा करने वाला मैसेज फर्जी है। 
सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च को  कहा,महामारी के बारे में स्वतंत्र चर्चा में हस्तक्षेप करने का हमारा इरादा नहीं है, लेकिन मीडिया को घटनाक्रम की जानकारी आधिकारिक पुष्टि के बाद प्रकाशित-प्रचारित किए जाने के निर्देश हैं।’ सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस  की पीठ ने पाया, ‘लॉकडाउन के दौरान शहरों में काम करने वाले मजदूरों की बड़ी संख्या में फेक न्यूज के चलते घबराहट पैदा हुई कि लॉकडाउन तीन महीने से ज्यादा समय तक जारी रहेगा। जिन्होंने इस तरह की खबरों पर यकीन किया, उन लोगों के लिए माइग्रेशन  अनकही पीड़ा बन गया। इस प्रक्रिया में कुछ ने अपना जीवन खो दिया। इसलिए हमारे लिए यह संभव नहीं है कि इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट या सोशल मीडिया द्वारा फर्जी खबरों को नजरअंदाज किया जाए।’ 
ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया है जो कोविड-19 से जुड़ी जानकारी साझा करने पर रोक लगाता हो। कोर्ट ने फर्जी खबरों पर चितां जरूर जताई है साथ ही मीडिया को रिपोर्टिंग में ज्यादा सावधानी बरतने के निर्देश दिए हैं   FORCE-TODAY

टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

कोटद्वार के जंगल में जब लावारिश लाश को पाया...फावड़े से वार ...

  कोटद्वार के जंगल में जब लावारिश लाश ...  पति की हत्या करने वाली पत्नी. सोनम रघुवंशी और मेरठ की मुस्कान रस्तोगी के बाद अब ऐसी ही एक खबर मुरादाबाद से सामने है. मुरादाबाद की रहने वाली रीना सिंधु ने अपने पति रविन्द्र कुमार की हत्त्या बिजनौर के रहने वाले अपने प्रेमी पारितोष कुमार के साथ मिलकर कर दी. इतना ही नहीं पति की हत्या के बाद उसकी लाश को कार में रखकर दो दिन तक उत्तराखंड की सड़कों पर घूमती रही. फिर कोटद्वार के जंगलों में सुनसान जगह देखकर शव को फेंक दिया. लेकिन पुलिस ने लावारिश लाश मिलने के बाद शुरू की जांच के बाद आरोपी पत्नी और उसके प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है.  इस कहानी की शुरुआत तब से होती है जब उत्तराखंड पुलिस ने कोटद्वार के जंगल में जब लावारिश लाश को पाया. फिर लाश की पहचान करने के लिए तफ्तीश शुरू की तो पति-पत्नी और वो की हैरान करने वाली कहानी सामने आई  जानकारी के अनुसार रविंद्र कुमार की मुरादाबाद के सिविल लाईन थाना इलाके के रामगंगा विहार कॉलोनी में एक पुराना मकान है. वो इस मकान को बेचना चाहते थे. लेकिन उनकी दूसरी पत्नी रीना सिंधु इसके खिलाफ थी. ऐसे में उसने प...

video कोटद्वार घराट मैं हत्या का प्रयास

  video कोटद्वार  घराट मैं हत्या का प्रयास यह कहावत अक्सर यह दर्शाती है कि लोग दूसरों के दर्द या परेशानी से दूर रहते हैं और केवल मनोरंजन के लिए मौजूद रहते हैं।

हरिद्वार: कांगड़ी में गंगा मैया की छाती चीर रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन video

 DATE - 24 DEC 2025 हरिद्वार: कांगड़ी में गंगा मैया की छाती चीर रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन VIDEO हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा की पवित्रता और उसके अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ताज़ा मामला कांगड़ी क्षेत्र का है, जहाँ 'गंगा मैया' की गोद में चोरी-छिपे अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि यह सब कुछ बिना किसी रोक-टोक के प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। ​ रात के अंधेरे में "सक्रिय ​स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कांगड़ी और उसके आसपास के तटवर्ती इलाकों में खनन माफिया  नियमों को ताक पर रखकर गंगा की जलधारा के बीचों-बीच से रेत और पत्थर निकाला जा रहा है। ​ बिना रोक-टोक जारी है 'काला कारोबार' ​हैरानी इस बात की है कि जिस क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, वहाँ बेखौफ होकर खनन सामग्री ढोई जा रही है।  ​ निगरानी का अभाव: संबंधित विभाग के अधिकारी इस ओर से आँखें मूँदे बैठे हैं। ​ पर्यावरण को खतरा: अंधाधुंध खनन के कारण गंगा का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। ​ आस्था और पर्यावरण...