सूत्रों के अनुसार कोटद्वार मै देह व्यापार का धन्धा जोरो पर-चल रहा है।
देवी रोड के कुछ होटल मै नेपाल की लड़किया और कोटद्वार की कुछ औरते
जो पहले भी पुलिस के हथे चढ़ चुकी है लोकडाउन के समय मै देह व्यापार का धन्धा चला
रही है लोकडाउन मे जहा बिज़नेस चौपट हो गये वही देह व्यापार का धन्धा जोरो पर-चल रहा है। सुबह दस बजे से लेकर दो बजे के बीच मे देह व्यापार जोरो परचलता है। कुछ महिलाए तो ऐसी है जो देह व्यापार अपने महगे शौक पूरे करने के लिये कर रही है। ये अपने ग्राहकसे दो हज़ार से लेकर पांच हज़ार तक डिमांड करती है। मोबाइल और व्हाटअप मे कोड नम्बर के जरिये इसकाम को अंजाम दिया जाता है। इन महिलाओं के पास अपनी स्कूटी है और single ड्राइव करती है फेस मेमास्क लगा कर आती है मतलब अपने घर से लेकर होटल तक पूरी guideline फॉलो करती है और होटल मेजाकर guideline खत्म। सोचो अगर इन मे से एक को भी कोरोना हुआँ होगा त्तो समझो क्या होगा।जब पत्ता चलेगा किसी को की मुझे कोरोना हुआ हैं तो वहः बताऐगा भी नहीं की मे किस के संपर्क मे आया था।वो अनजान बना रहेगा। मतलब चैन बन चुकी है वो चैन तोड़ना प्रशासन के लिए मुश्किल हो जायेग़ा।कोटद्वार रेड जोन मे चला जायेग़ा।देह व्यापार करने वालो के मोबाइल नंबर भी रजीस्टर नहीं होते। प्रशासन को इस तरफ चौकस होना
होगा। क्यूंकि ये लोग समाज के दुश्मन है। इनहे अपने शौक पूरे करने है इनहे समाज से कोई लेना
देना नहीं। हमे अपने समाज को सेफ करना है इन देह व्यापार करने वालों से.सुरक्षित समाज तो सुरक्षित आप
DATE - 24 DEC 2025 हरिद्वार: कांगड़ी में गंगा मैया की छाती चीर रहा अवैध खनन, प्रशासन मौन VIDEO हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा की पवित्रता और उसके अस्तित्व पर एक बार फिर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ताज़ा मामला कांगड़ी क्षेत्र का है, जहाँ 'गंगा मैया' की गोद में चोरी-छिपे अवैध खनन का खेल धड़ल्ले से जारी है। हैरत की बात यह है कि यह सब कुछ बिना किसी रोक-टोक के प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। रात के अंधेरे में "सक्रिय स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कांगड़ी और उसके आसपास के तटवर्ती इलाकों में खनन माफिया नियमों को ताक पर रखकर गंगा की जलधारा के बीचों-बीच से रेत और पत्थर निकाला जा रहा है। बिना रोक-टोक जारी है 'काला कारोबार' हैरानी इस बात की है कि जिस क्षेत्र में खनन पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए, वहाँ बेखौफ होकर खनन सामग्री ढोई जा रही है। निगरानी का अभाव: संबंधित विभाग के अधिकारी इस ओर से आँखें मूँदे बैठे हैं। पर्यावरण को खतरा: अंधाधुंध खनन के कारण गंगा का प्राकृतिक बहाव बदल रहा है, जिससे भविष्य में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। आस्था और पर्यावरण...


टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें